शनिवार, 28 सितंबर 2013

उक्ति - 13

इसे देश का दुर्भाग्‍य ही कहेंगे कि किसानों की आत्‍महत्‍याएं और सैनिकों के बलिदान भी लोगों को झकझोर नहीं पा रहे हैं।
लेफ्टिनेंट कर्नल विक्रमजीत सिंह के अन्तिम-संस्‍कार
 के समय रोती-बिलखती उनकी प्‍यारी पुत्री

4 टिप्‍पणियां:

  1. हमारी संवेदनशीलता मरती जा रही हैं...

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  2. सच है आज के युग में संवेदनाओं का ह्रास हुआ है |सब लोग अपने तक ही सीमित हो कर रह गए हैं

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  3. सच कहा, एक वाक्य ही चोट करने के लिये पर्याप्त है।

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  4. मृत स समाज है आज ... विलास में डूबा ...

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