रविवार, 15 सितंबर 2013

उक्ति - 7

कुर्ता-पायजामा, खादी वस्‍त्रधारी अधिकांश नेताओं के भाषण अंग्रेजी भाषा में होते हैं। हम ये भी सुनते-देखते हैं कि राष्‍ट्रपति महोदय धर्म में गहरा विश्‍वास रखते हैं, गृहमन्‍त्री गणेश चतुर्थी के लिए गणेश भगवान की धर्म विधि से पूजा-अर्चना करते हैं, वित्‍त मन्‍त्री धोती पहनते हैं। उदाहरण बहुत हैं बताने को कि धर्मकर्म में अनेक नेता विश्‍वास रखते हैं। परन्तु अपनी भाषा, राजभाषा, राष्‍ट्रीय भाषा हिन्‍दी को स्‍वयं के, भारत के व्‍यवहार में उतारना इन्‍हें पता नहीं क्‍यों अच्‍छा नहीं लगता। इससे अधिक कष्‍टकारी विडम्‍बना इस राष्‍ट्र के लिए और क्‍या हो सकती है?

3 टिप्‍पणियां:

  1. सहमत हूं आपकी बात से ... कम से कम राजनेताओं के लिए भाषा ज्ञान अनिवार्य होना चाहिए ... सार्वजनिक स्थान पे या तो हिंदी या क्षेत्रीय भासा में ही बोलना चाहिए ...

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