सोमवार, 16 सितंबर 2013

उक्ति - 8

दु:ख और पीड़ा में जो भावनाएं उभरती हैं, वही भावनाएं सुख के चरमोत्‍कर्ष के दौरान भी होनी चाहिए। तब ही मानवों के मध्‍य मानवोचित संवेदनाएं बनी रहेंगी।

6 टिप्‍पणियां:

  1. हाँ ऐसा होना तो चाहिए और शायद कई बार होता भी है, किन्तु सुख के दौरान हम उन भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाते...

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  2. फिर तो इन्सान निर्वाण की तरफ मुड जाएगा ...

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