बुधवार, 18 सितंबर 2013

उक्ति - 9

जीवन को स्‍वस्‍थ, ऊर्जावान बनाए रखने का सबसे बड़ा स्रोत प्राकृतिक संगीत है। इसे सुनने से किसी वेदांत-ग्रन्‍थ, सन्‍त-महात्‍मा, गुरु के प्रवचनों को सुनने की आवश्‍यकता नहीं रहती।

10 टिप्‍पणियां:

  1. सत्य वचन...केवल सुनने की इच्छा होनी चाहिए।

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  2. सुन्दर बात कही है आपने -

    प्रकृति तो हमसे सम्वाद करती है हमारे कान में प्लग होते हैं ,आई पॉड के ,..... पेड़ ने मुझे रोककर कहा था -कहाँ चल दिए भाई साहब हम भी ध्यानावस्थित हैं हमें भी देखो। .... ये शब्द जाल नहीं है -पीस विलेज ,हंटर हिल्स ,न्युयोर्क का सच्चा किस्सा है। पहाड़ों से घिरी ये घाटी ,वो बत्तखों का परस्पर संवाद ,प्रकृति का अपना संगीत हमें पांच दिनी रिट्रीट में विमुग्ध किये रहा। अभागे हैं हम लोग जो प्रकृति नटी से मौक़ा मिलने पर भी संवाद नहीं करते। मुंबई के सबसे खूबसूरत कोलाबा डिफेंस स्टेशन के प्रामनाड (promenade)तटबंध पर यह नज़ारा मैं ने सुबहो - शाम देखा है -लोग सैर कर रहें हैं हाथों में पानी की बोतल है कानों में प्लग।

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  3. सहमत आपकी बात से ... प्राकृति का साथ, उसका संगीत अपने आप में अमृत से कम नहीं ...

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  4. आपकी बात से सहमत हूँ विकेश जी,सुन्दर बात कही है आपने केवल सुनने की इच्छा होनी चाहिए।

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  5. कुमार गंधर्व चिड़ियाओं की आवाज को कैसेट मे रेकॉर्ड करके सुनते थे

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  6. हम कितना कुछ पीछे छोड़ आए वो हमारा गाँव वो नदियां वो कुंडा का मैदान वो पथोड्या का मनोरम दृश्य वो एकेश्वर बाज़ार बडोली का जंगल का कुले का डाला
    पूरा प्रकृति धन छोड़ आए

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