गुरुवार, 17 अक्तूबर 2013

उक्ति - 20


मानवीय सम्‍बन्‍धों की अन्‍तर्जटिलताओं व अन्‍तर्विरोधों से पीड़ित संवदेनशील व्‍यक्ति मृत्‍यु से पूर्व यदि किसी के प्रति घनघोर रुप से आसक्‍त होता है तो यह है 'प्रकृति' और दुर्भाग्‍य से इसी को मानवजाति नष्‍ट करने पर तुली हुई है।

5 टिप्‍पणियां:

  1. यही तो सबसे बड़ी समस्या है या स्वभाव कुछ भी कह लीजिये है, मानवजाति की जो हमारा सबसे ज्यादा ख्याल रखता, जो हमें सुकून पहुंचाता है, जिसकी हमे हमारे जीवन में सार्वधिक अवश्यकता होती है। अक्सर हम उसी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाते है फिर चाहे वो प्रकृति हो या आपसी रिश्ते...आपका का क्या ख़्याल है ?

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  2. संवेदनशील भी अपनी प्रकृति बचा ले तो बहुत है इस समय में..

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  3. बिल्कुल सच कहा है, बेहद सुन्दर उक्ति विकेश जी आभार।

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