शुक्रवार, 29 नवंबर 2013

उक्ति - 23

मानव साथी मानव का उचित मान-सम्‍मान तभी कर सकता है जब वह खुद को भलीभांति समझ चुका हो। क्‍या हम सब खुद को अच्‍छी तरह से समझ सके हैं? यह प्रश्‍न सभी को स्‍वयं से अवश्‍य पूछना चाहिए और हो सके तो इसका ईमानदार उत्‍तर ही दिया जाना चाहिए।

10 टिप्‍पणियां:

  1. यही तो समस्या है आमतौर पर हमें हमेशा ऐसा लगता है कि हमें कोई समझता ही नहीं है। लेकिन वास्तविकता यह है कि हम स्वयं ही खुद को कभी समझ ही नहीं पाते और उम्र बीत जाती है। तो दूसरे को क्या समझेंगे इसलिए यदि एक इंसान खुद को ही समझ ले तो शायद दुनिया की कई सारी समस्या खुद ही सॉल्व हो जाएँ। ऐसा मुझे लगता है।

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  2. अगर हम स्वयं को समझ लें तो फिर किसी को भी समझना बहुत आसान होगा...

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  3. यथार्थ यही है:


    हम सब एक ही परमात्मा के अंश हैं। इस भौतिक जगत का इस काया को अपना समझना सबसे बड़ी माया है। न हम यहाँ कुछ लाये थे न यहाँ से कुछ ले जाना है।न यहाँ कुछ हमारा है जो टिकाऊ हो फिर दुराव कैसा ?बढ़िया प्रस्तुति।

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  4. यही तो इस जीवन की सच्चाई है, पर कहने, सुनने और सोचने में जितना ही सहज और आसान लगता है, यथार्थ में उसका अनुपालन करना उतना ही कठिन और दुरूह है। जिस दिन व्यक्ति खुद को समझ लेगा, वह महामानव न सही तो मानव की भूमिका में जरूर आ जाएगा। मेरा आशय इस बात से है कि एक पशु का आचरण पशु जैसा होना निश्चित है, पर एक एक मनुष्य का आचरण मानव जैसा होना निश्चित नहीं है, वह मनुष्य की शक्ल में शैतान, हैवान, जानवर, भेडिये जैसी शक्ल में भी नजर आ जाता है। ऐसे में खुद को समझना मानवता की शिखर पर पहुंचना है। ऐसी ही मेरी समझ है। प्रस्तुति हमारी, मूल्यांकन आपका।

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  5. यही तो जीवन की सच्चाई और यथार्थ है, !!!
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    नई पोस्ट-: चुनाव आया...

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  6. खुद को तो इन्सान उम्र भर नहीं समझ पाता ...

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