शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

उक्ति - 31

मनुष्‍य की भौतिक महत्‍वाकांक्षाएं उसके जीवन से ज्‍यादा बड़ी नहीं होनी चाहिए।

4 टिप्‍पणियां:

  1. होनी तो नहीं चाहिए...मगर आजकल जीवन की परिभाषा ही भौतिक महत्वकांगक्षाओं की पूर्ति तक सिमट कर रेह गयी है।

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