शनिवार, 8 फ़रवरी 2014

उक्ति - 34

वस्‍तु उत्‍पादन और उपभोग प्रणाली पर केन्द्रित संसार में भ्रष्‍टाचार कभी समाप्‍त नहीं हो सकता। हां उसका स्‍तर छोटा-बड़ा अवश्‍य हो सकता है।

6 टिप्‍पणियां:

  1. उपभोग में से भोग ,भोग में से रोग रूपा भ्रष्टाचार निकलता है बहुत सुन्दर।

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  2. चोग भोग यूज़ एंड थ्रो ही इस वक्त का फेड है। बज़ वर्ड है।

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  3. कुछ कुछ सहमत हूँ आपकी बात से ... पर न्याय प्रणाली पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है ...

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