गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

उक्ति - 45

जीवन का सुख और मृत्‍यु का दुख मानव-जीवन के दो विराट पहलू हैं। वैचारिक स्‍तर पर हमेशा इनसे जुड़े रहना वैश्विक शान्ति के लिए परम आवश्‍यक है।

4 टिप्‍पणियां:

  1. जीवन और मृत्यु को हटादें तो उक्ति और भी असरदार बनती है क्योंकि जीवन और मृत्यु दोनों ही मनुष्य के हाथ में नही हैं लेकिन सुखी व दुखी रहना उसकी मानसिकता पर ही निर्भर है ।

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