सोमवार, 2 जून 2014

उक्ति - 48

चारित्रिक पतन मनुष्‍य को इस योग्‍य भी नहीं छोड़ता कि वह रात को यह याद रख सके कि उसने सुबह कलेवा में क्‍या खाया था।

6 टिप्‍पणियां:

  1. चरित्र का पतन मनुष्य का पतन है ... सहमत आपकी बात से ...

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  2. "सही चीजो को , सही ढंग से करना ही चरित्र है "
    मेरे ब्लॉग की नवीनतम रचनाओ को पढ़े और अगर आपको सही लगे तो फॉलोवर बनकर कमेंट के रूप में सुझाव देकर हमारा मार्दर्शन करें

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  3. पूर्णतः सहमत आपकी बात से....

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  4. सुन्दर प्रस्तुति-
    बहुत बहुत शुभकामनायें आदरणीय-

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