सोमवार, 7 जुलाई 2014

उक्ति - 50

आधुनिक संसार में व्‍यक्ति का नहीं उसकी सामाजिक योग्‍यता एवं आर्थिक शक्ति का ही सम्‍मान होता है। व्‍यक्ति का नि:स्‍वार्थ सम्‍मान करनेवाली पारम्‍परिक व्‍यवस्‍था कब की नष्‍ट हो चुकी है।

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